डॉक्टर के पास जाए बिना मुझे एंटीबायोटिक्स कैसे मिल सकते हैं?HealthPlanet

Posted on Mon 5th Dec 2022 : 09:04

एंटीबायोटिक दवाइयां बैक्टीरियाज़ से होने वाली बीमारियों के इलाज में काम आती हैं लेकिन इनके साइडइफेक्ट्स भी हैं। इन्हें डॉक्टर्स की बिना सलाह के लेना खतरनाक हो सकता है। मुझे यही लगा कि एक बीमारी ठीक कराने के चक्कर में मुझे दूसरी बीमारी हो गई, बताइए कैसी दवाएं हैं ये? लेकिन डॉक्टर से बात करने पर पता चला कि गलती मेरी है। अगर सही डोज़ में, डॉक्टर की सलाह से ली जाएं तो इन दवाइयों के साइडइफेक्ट्स नहीं होते। एंटीबायोटिक्स के बारे में और जानने के लिए गाँव कनेक्शन ने कुछ डॉक्टर्स से बात की।

डॉक्टर्स बताते हैं, एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल करने पर जो बैक्टीरिया हैं वो रसिस्टेंट हो जाते हैं। इसका अर्थ है कि अगर आप गलत तरीकों और अत्याधिक मात्रा (आपके शरीर की ज़रूरत से ज़्यादा) में एंटीबायोटिक्स लेते हैं तो जिन बैक्टीरियाज़ की वजह से आपको बीमारी होती है उन पर ये दवाइयां असर करना बंद कर देती हैं।

एंटीबॉयोटिक्स से होने वाले साइडइफेक्ट्स में डायरिया सबसे आम है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद की वर्ष 2017 में जारी हुई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में ये 7.1 प्रतिशत से 26.6 प्रतिशत बढ़ा है। ये रिपोर्ट भारत सरकार के स्वास्थ्य
अनुसंधान विभाग, नई दिल्ली के अंतर्गत वर्ष 2015 से 2017 के बीच हुई थी। वेंटिलेटर एसोसिएटेड निमोनिया भी मरीज़ों में आम है।

आईसीयू में भर्ती 8 से 20 प्रतिशत मरीज़ों को ये बीमारी होती है। वहीं 27 प्रतिशत ऐसे मरीज़ों को जो मशीन के सहारे पर होते हैं। साभार- The drink bussiness हमारे देश में जानकारी का अभाव एंटीबायोटिक्स से होने वाले नुकसान और साइडइफेक्ट्स के लिए सबसे ज़्यादा ज़िम्मेदार है। डॉक्टर सूर्यकान्त त्रिपाठी कहते हैं, "हमारे यहां सबसे ज़्यादा फ्लू जिसे सर्दी-ज़ुकाम कहते हैं और हर आदमी सोचता है कि फ्लू में भी एंटीबॉयोटिक लेना है जो कि गलत है। फ्लू एक वायरल बीमारी है, इसका एंटीबॉयोटिक से कोई लेना देना नहीं है।" ये भी पढ़ें- चर्म रोगों को न लें हल्के में, तुरंत कराएं इलाज वो आगे बताते हैं, "हमारे देश में एक और चीज़ है कि एंटीबॉयोटिक केवल ऐलोपैथी का डॉक्टर नहीं लिख रहा है। होम्योपैथी वाला भी लिख रहा है, आयुर्वेद वाला भी लिख रहा है, झोला छाप भी लिख रहा है। अपने यहां ये भी रोक नहीं है कि एंटीबॉयोटिक केवल

मॉडर्न मेडीसिन प्रेक्टिस करने वाला डॉक्टर लिखे। प्रिस्क्रपशन की भी ज़रूरत नहीं है, आप सीधे मेडिकल स्टोर से खरीद सकते हैं।" दुनिया के कई देशों में एंटीबायोटिक्स को लेकर सख्त नियम हैं। इनके इस्तेमाल के सही तरीकों पर बहुत ज़ोर दिया जाता है, कई जगह इन्हें कम करने की कवायद शुरू हो चुकी है लेकिन भारत में फिलहाल इनके विनियमन पर किसी तरह के ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

एंटीबायोटिक दवाओं के इस्तेमाल के लिए गाइडलाइन्स जारी करता है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद की रिपोर्ट में आंकड़ों के साथ एंटीबायोटिक्स के लिए गाइडलाइन्स भी बताई हैं पर दिक्कत ये है कि ये आम डॉक्टर्स तक पहुंच ही नहीं पातीं। इस बारे में डॉक्टर ऋचा कहती हैं, "हमारे देश में बड़ी संख्या में प्राइवेट डॉक्टर्स हैं। इन तक गाइडलाइन्स सही रूप में पहुंच नहीं पातीं। इनके अलावा अयोग्य डॉक्टर्स की संख्या भी बहुत ज़्यादा है। ये छोटे कस्बों में, गाँवों में होते हैं। जो मेडिकल प्रोफेश्नल्स हैं ही नहीं वो भी गांवों में, जिलों में बैठ कर दवाएं दे रहे हैं। उनकी पहचान ही नहीं हो पाती है तो गाइडलाइन्स पहुंचना तो असंभव है।" "गाइडलाइन्स ज़ारी होती हैं लेकिन दिक्कत ये है कि उन्हें सब तक पहुंचाया कैसे जाए? हमारे देश में दस लाख ऐलोपैथी के डॉक्टर हैं, 10 लाख आयुष के डॉक्टर्स हैं और इन सबसे ज़्यादा करीब एक करोड़ अपंजीकृत डॉक्टर्स हैं," - डॉक्टर आर. के. दीक्षित कहते हैं।

"एंटीबॉयोटिक्स से कुछ लोगों को साइडइफेक्ट्स हो सकते हैं। अमॉक्सीफिलिन एक सामान्य एंटीबॉयोटिक है इससे हर चौथे, पांचवे मरीज़ को दस्त होते हैं। ऐसे में मरीज़ को ये नहीं समझना चाहिए कि कोई नई बीमारी हो गई है। उसे तुरन्त डॉक्टर को बताना चाहिए। एंटीबॉयोटिक्स जल्दी असर करती है। एंटीबॉयोटिक का उतना ही उपयोग करें जितनी ज़रूरत हो। साथ ही जैसे डॉक्टर बताए बिल्कुल वैसे ही लेना चाहिए," - एंटीबायोटिक दवाओं के साइडइफेक्ट्स पर वो कहते हैं। ये भी पढ़ें- जानिए जुकाम और फ्लू में अंतर, जुकाम को साधारण बीमारी समझकर न करें लापरवाही एंटीबायोटिक्स का लोगों के स्वास्थ्य पर गलत असर न हो इसके लिए डॉक्टर दीक्षित बताते हैं, "सरकार एक नियम बना दे कि बिना डॉक्टर्स के प्रिस्क्रपशन के दवा नहीं मिलेगी तो आधी समस्या तो ऐसे ही दूर हो जाएगी। गाइडलाइन्स में अपग्रेडेशन होना चाहिए यानी डॉक्टर्स को अद्यतन जानकारी देना। डॉक्टर्स को पूरी जानकारी देना कि कब एंटीबॉयोटिक देना है कब नहीं देना है, किसी बीमारी में कौन सी एंटीबॉयोटिक देना है? सामाजिक जागरूकता होनी चाहिए।"

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